शंख बजाइए और इन बीमारियों को दूर भगाइए

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पूजा-पाठ करनेवाला हर व्यक्ति जानता है कि पूजा के बाद शंख बजाया जाता है। मंदिरों से अक्सर घंटे के साथ ही शंख की ध्वनि भी सुनाई देती है। कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि आखिर पूजा के बाद शंख क्यों बजाया जाता है? इसे रखने का सही तरीका क्या होता है और यह किस तरह हमारी सेहत को लाभ देता है। आइए, आज इन्हीं सवालों के जवाब जानते हैं…

क्यों महत्वपूर्ण है शंख

  •  शंख की उत्पत्ति जल से मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान जल से निकले 14 रत्नों में शंख भी शामिल है।
  • शंख ध्वनि को पुराणों में कल्याणकारी और विजयनाद बताया गया है।

शंख रखने का सही तरीका

  • शंख को पूजाघर में नहीं रखना चाहिए बल्कि पूजाघर स्थल के पास तिपाए पर रखना चाहिए।
  • पूजा के समय शंख को अंदर-बाहर से पीले रंग के कपड़े से साफ करना चाहिए।
  • पूजा के समय शंख का भी तिलक करना चाहिए और पुष्प चढ़ाने चाहिए।
  • शंख पर कभी भी अक्षत नहीं चढ़ाए जाते।
  • पूजा करते वक्त शंख को इस तरह रखें कि उसका मुख आपकी तरफ होना चाहिए।
  • पूजा के बाद शंख को साफ करके ही रखना चाहिए।

शंख बजाने से होते हैं ये स्वास्थ्य लाभ

  • शंख में गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम होते हैं। इसमें रखा हुआ जल रोगाणु रहित हो जाता है। इस जल का सेवन स्वास्थ्य बढ़ाता है।
  • शंख बजाने से बोलने संबंधी दिक्कतें जैसे अशुद्ध उच्चारण और हकलाने की समस्या दूर होती है।
  • शंख बजाने के दौरान कुंभक प्राणायाम की प्रक्रिया होती है, जो हमारे तंत्रिकातंत्र को ऐक्टिव करती है।
  •  वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख के प्रभाव से सूर्य की हानिकारक किरणें बाधित होती हैं। इसलिए सुबह-शाम पूजा में शंख बजाने का विशेष महत्व है।

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