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लक्ष्मी जी

आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वन्तरि

समुद्र मंथन के समय शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धन्वंतरी, चतुर्दशी को काली माता और अमावस्या को भगवती लक्ष्मी जी का सागर से प्रादुर्भाव हुआ था। इसीलिये दीपावली के दो दिन पूर्व धनतेरस को भगवान धन्वंतरी का जन्म धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।

कुछ खास है हमारा पान का पत्ता I

हिन्दू धर्म में भगवान की पूजा करते समय नियमों का पालन करना अनिवार्य समझा जाता है। पूजा की सारी विधि एवं सामग्री उपस्थित होना भी एक महत्वपूर्ण बिंदु है। इसी पूजा सामग्री में से एक खास वस्तु है ‘पान’, जिसे संस्कृत भाषा में तांबूल भी कहा जाता है।पान का यह नाम तांबूल ‘ताम्र’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है कोई ऐसी वस्तु जो तांबे के रंग जैसी या लाल रंग की हो। यह लाल रंग पान के पत्ते पर लगे ‘कत्थे’ को दर्शाता है। भारत में आधी से ज्यादा जनसंख्या पान खाना पसंद करती है। पूर्वी एवं मध्य भारत में तो पान खाने का प्रचलन काफी अधिक है। जानिए…

आरती श्री लक्ष्मी जी

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का…